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बलिया में दर्दनाक हादसा: गौवंश की देखभाल करने वाले केयरटेकर की आक्रामक पशु के हमले में मौत, चराने के दौरान बैल ने किया हमला, पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा

नगरा, बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगरा थाना क्षेत्र के पकड़ी हरख बसंत (भगत का पुरा) निवासी एक वृद्ध की गौवंशीय पशु के हमले में दर्दनाक मौत हो गई। मृतक सरकार द्वारा संचालित गौ आश्रय स्थल में संरक्षित पशुओं की देखभाल और चराने का काम करता था। घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।मृतक अवधकिशोर पकड़ी हरख बसंत, भगत का पुरा, नगरा, जिला बलिया के निवासी थे। ग्रामीणों के अनुसार अवधकिशोर पिछले कई वर्षों से सरकार द्वारा गौ आश्रय में संरक्षित किए गए निराश्रित गौवंशों की सेवा कर रहे थे। वे पशुओं को चराने के लिए खेत की ओर ले गए थे।

इसी दौरान चरते हुए एक पशु अचानक आक्रामक हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक गोवंश ने अचानक उग्र होकर केयरटेकर पर हमला कर दिया।  तथा सींग से उठाकर पटक दिया और पैरों से कुचल दिया। हमला इतना जोरदार था कि अवधकिशोर गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़े।

आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया और किसी तरह आक्रामक पशु को काबू में किया। आनन-फानन में घायल अवधकिशोर को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

मृतक अवधकिशोर सरकार की निराश्रित गोवंश संरक्षण योजना के तहत गांव में बने अस्थायी गौ आश्रय स्थल में दर्जनों गाय और बैलों को रखा गया है। अवधकिशोर उन्हीं पशुओं की देखरेख, चारा-पानी और चराने का काम करते थे। उनकी मौत से गौ आश्रय से जुड़े लोगों में भी गहरा दुख है। घटना की सूचना मिलते ही नगरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल बलिया भेज दिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर सरकार द्वारा संचालित गौ आश्रयों में काम करने वाले केयरटेकरों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया है। अक्सर देखा जाता है कि आश्रयों में संरक्षित कई बैल और सांड़ काफी आक्रामक होते हैं। बिना किसी सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षण के गरीब मजदूर इन पशुओं की सेवा करते हैं, जिससे इस तरह की दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि मृतक के परिवार को सरकार की ओर से उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता दी जाए, क्योंकि वह सरकारी कार्य करते हुए हुए मौत के घाट उतरा है।अवधकिशोर अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिनके सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

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पवन कुमार पाण्डेय
पवन कुमार पाण्डेय
प्रधान सम्पादक

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