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IPS अविनाश पाण्डेय, इलामरन और कमलेश बहादुर पर गिरी गाज, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तीनों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू, कोर्ट ने कहा था – UP में Total Breakdown of Law & Order

विशेष रिपोर्ट: प्रधान संपादक पवन कुमार पाण्डेय

लखनऊ/मऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस के तीन आईपीएस अफसरों पर बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। 2015 बैच के आईपीएस अविनाश पांडेय, 2016 बैच के आईपीएस इलामरन और प्रमोटी आईपीएस 2017 बैच के कमलेश बहादुर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विभागीय जांच शुरू हो गई है। इन तीनों अफसरों पर मऊ में तैनाती के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर लापरवाही बरतने का आरोप है।

सोशल मीडिया पर ममता त्रिपाठी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पुलिस के कामकाज के तरीके को *”लापरवाह रवैया”* और *‘Total Breakdown of Law & Order in UP’* करार दिया था, जिसके बाद यह एक्शन लिया गया है।

दरअसल यह पूरा मामला मऊ जिले से जुड़ा है। मऊ में एक आपराधिक मामले में एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 2023 के बाद से मऊ में तैनात रहे सभी एसपी पर कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को आदेश दिया था कि वह 16 नवंबर तक बताएं कि इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है। इसी आदेश के अनुपालन में शासन ने कार्रवाई शुरू की है।

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद सबसे पहले मौजूदा एसपी कमलेश बहादुर को मऊ से हटा दिया गया था। 7 अक्टूबर को हुए बड़े फेरबदल में उन्हें मऊ से हटाकर लखनऊ में डीजीपी मुख्यालय में एसपी लोक शिकायत के पद पर भेजा गया था। अब उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी गई है।

कौन हैं तीनों आईपीएस?
अविनाश पांपाण्डे (2015 बैच):  मूल रूप से लखीमपुर खीरी के रहने वाले हैं। मऊ, पीलीभीत, मेरठ जैसे जिलों में एसपी/एसएसपी रह चुके हैं। पीलीभीत में खालिस्तानी आतंकियों के एनकाउंटर और मऊ में मुख्तार अंसारी की संपत्ति जब्त करने को लेकर चर्चा में रहे थे। हाल ही में मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड के प्रदर्शन के दौरान थप्पड़ कांड को लेकर विवादों में आए थे और उन्हें डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था।

इलामरन (2016 बैच):  इलामरन भी मऊ में एसपी के पद पर तैनात रह चुके हैं और तेजतर्रार अफसरों में गिने जाते हैं।

कमलेश बहादुर (2017 बैच): प्रमोटी आईपीएस हैं, यानी पीपीएस से प्रमोट होकर आईपीएस बने हैं। 31 मार्च 2024 को उन्होंने मऊ के एसपी के रूप में चार्ज लिया था और करीब 5 महीने तक जिले की कमान संभाली।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि यूपी पुलिस में एफआईआर के बाद जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी तरह से लापरवाह है। मऊ में 2023 के बाद कई जघन्य अपराधों में पुलिस ने जानबूझकर ढिलाई बरती। इसी को कोर्ट ने *”Total Breakdown of Law & Order in UP”* कहा था।

इस टिप्पणी के बाद यूपी सरकार बैकफुट पर आ गई थी। आनन-फानन में 10 जिलों के कप्तान बदले गए थे, जिसमें मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, बलिया, बस्ती जैसे जिले शामिल थे।

अब तीनों आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू होने के बाद माना जा रहा है कि जल्द ही इन पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई भी हो सकती है। इस कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

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पवन कुमार पाण्डेय
पवन कुमार पाण्डेय
प्रधान सम्पादक

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