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मधुबन चेयरमैन आरती मल्ल की बढ़ी मुश्किलें, हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव को कार्रवाई का दिया निर्देश

मऊ ,उ.प्र.। नगर पंचायत मधुबन की चेयरमैन आरती मल्ल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चेयरमैन के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों को लेकर प्रमुख सचिव नगर विकास को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट के इस निर्देश के बाद नगर पंचायत कार्यालय में हड़कंप मचा हुआ है।

बताया जा रहा है कि नगर पंचायत मधुबन के सभासद अखिलेश राज और नीलेश राजरत्नम ने चेयरमैन आरती मल्ल पर अपने पद का दुरुपयोग कर अपने सगे संबंधियों को नौकरी पर रखकर लाखों रुपये के सरकारी धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था।

सभासदों ने आरोप लगाया था कि चेयरमैन आरती मल्ल ने अपनी 74 वर्षीय सगी सास को सफाई कर्मी के पद पर रखकर 2 लाख 20 हजार 898 रुपये का भुगतान कराया है। जबकि सफाई कर्मी के लिए शारीरिक रूप से सक्षम होना जरूरी है।

इसी तरह अपनी सगी बहन को भी नगर पंचायत में रखकर 3 लाख 46 हजार 846 रुपये का भुगतान कराने का आरोप है। इतना ही नहीं, चेयरमैन ने अपने पट्टीदार दंपति जिनकी उम्र 70 और 72 वर्ष है, उन्हें भी आउट सोर्सिंग में रखकर लाखों रुपये का सरकारी धन का दुरुपयोग किया है।

सभासदों का कहना था कि यह पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है। 70 से 74 साल के बुजुर्ग लोगों से सफाई का काम लेना और उन्हें वेतन देना सरकारी खजाने को लूटने जैसा है। जब इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई तो कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे क्षुब्ध होकर सभासदों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

0 हाईकोर्ट में दाखिल की थी रिट…
सभासद अखिलेश राज और नीलेश राजरत्नम ने इस पूरे मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने सभी साक्ष्य और अधिकारियों की जांच रिपोर्ट भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की। सुनवाई के दौरान विद्वान अधिवक्ता ने तर्क दिया कि यह मामला भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है। वहीं उच्च अधिकारियों की रिपोर्टों के अवलोकन के बाद माननीय न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लिया।

सभी पक्षों को सुनने और रिपोर्टों का अवलोकन करने के बाद माननीय उच्च न्यायालय ने चेयरमैन सहित इस अनियमितता में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को दिया है।कोर्ट ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और सरकारी धन की वसूली भी की जाए।

हाईकोर्ट के इस आदेश की खबर जैसे ही मधुबन पहुंची, नगर पंचायत कार्यालय में हड़कंप मच गया। कर्मचारियों में इस आदेश को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। वहीं सभासदों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।

सभासदों का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आखिरकार सच की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत अध्यक्ष का पद एक जिम्मेदारी का पद है, न कि अपने परिवार को लाभ पहुंचाने का। सरकारी धन जनता का धन है, उसका दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उधर, इस मामले में चेयरमैन आरती मल्ल पक्ष से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बताया जा रहा है कि चेयरमैन पक्ष इस आदेश को लेकर अपने अधिवक्ताओं से संपर्क में है।

फिलहाल हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रमुख सचिव कार्यालय से जल्द ही कार्रवाई शुरू होने की उम्मीद है।

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पवन कुमार पाण्डेय
पवन कुमार पाण्डेय
प्रधान सम्पादक

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