Home मऊ घाघरा उफान पर बाढ़ पीड़ितों की बढ़ी मुश्किल

घाघरा उफान पर बाढ़ पीड़ितों की बढ़ी मुश्किल

मऊ। जनपद के मधुबन तहसील क्षेत्र के अंतिम छोर पर स्थित घाघरा नदी इस समय पूरे उफान पर है। नदी का पानी अपनी गोद से निकलकर खेतों, रास्तों और निचले इलाकों में फैलने लगा है। इससे तटवर्ती दर्जनों गांवों की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है। खेतों में पानी भरने से फसलें डूब गई हैं, आने-जाने के रास्ते बंद हो गए हैं और पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है। उनका आरोप है कि घाघरा के बढ़ते जलस्तर की समस्या हर साल आती है, लेकिन समाधान के लिए कोई भी अधिकारी समय से पूर्व मौके पर नहीं आता। प्रशासन के सारे फरमान सिर्फ फाइलों में सिमट कर रह गए हैं।
घाघरा के किनारे बसे जरलहवा, विन्टोलिया , धर्मपुर बिशनपुर, चक्की मुसाडोही सहित कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। घाघरा का पानी खेतों में भरने से धान और हरे चारे की फसल पूरी तरह डूब गई है। किसानों का कहना है कि जो फसल बची थी, वह भी पानी में सड़ रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि खेतों से होकर जाने वाले चकमार्ग और संपर्क मार्ग पूरी तरह डूब रहें हैं। लोगों को घुटने भर पानी से होकर आना-जाना पड़ रहा है। स्कूली बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही है। पशुपालकों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है क्योंकि चारे के अभाव में पशुओं को खूंटे पर भूखा रखना पड़ रहा है।
बाढ़ के पानी के साथ गंदगी फैलने से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। कई गांवों में हैंडपंप डूब गए हैं, जिससे पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। बिजली के खंभे पानी में डूबने के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप है। रात में अंधेरे और पानी के बीच लोगों को जागकर रात गुजारनी पड़ रही है।
ग्रामीण चंदन दुबे, लाल साहब यादव, संतोष तिवारी, अभिषेक पाण्डेय, लीलावती, मीना देवी , रंभा आदि ने बताया कि हर साल बाढ़ के समय अधिकारी निरीक्षण की बात कहते हैं, लेकिन मौके पर कोई नहीं आता। बाढ़ चौकी पर न तो नाव की व्यवस्था है और न ही राहत सामग्री।
जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने भले ही बाढ़ चौकियों को सक्रिय करने और सभी विभागों को एक्टिव मोड में रहने के निर्देश दिए हों, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि धरातल पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा। लेखपाल और सेक्रेटरी गांव में नहीं आ रहे। स्वास्थ्य विभाग की टीम अभी तक दवा और क्लोरीन का वितरण करने नहीं पहुंची।
ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल नाव की व्यवस्था की जाए, पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराया जाए, पीने के पानी के टैंकर भेजे जाएं और स्वास्थ्य शिविर लगाकर दवाओं का वितरण किया जाए। साथ ही कटान रोकने के लिए बोरियों और बोल्डर की व्यवस्था की जाए।
वहीं एसडीएम दीपक सिंह का कहना है कि घाघरा के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। तटवर्ती गांवों में लेखपालों को भेजकर रिपोर्ट ली जा रही है। यदि पानी और बढ़ा तो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की व्यवस्था की जाएगी।
फिलहाल घाघरा का उफान जारी है और तटवर्ती गांवों में दहशत का माहौल है। यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here