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मऊ में पत्रकार से अभद्रता पर हंगामा: आज अखबार के ब्यूरो चीफ को सारयू चौकी के सिपाही ने अपराधी बताकर घंटों रोका, की सघन पूछताछ; पत्रकार संगठनों में उबाल, एसपी से कार्रवाई की मांग

प्रधान संपादक:पवन कुमार पाण्डेय

मऊ। उत्तर प्रदेश के जनपद मऊ में पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिले के एक प्रतिष्ठित दैनिक अखबार ‘आज’ के ब्यूरो चीफ के साथ सारयू चौकी के एक कांस्टेबल द्वारा अपराधी जैसा व्यवहार करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कांस्टेबल ने ब्यूरो चीफ को यह कहते हुए रोक लिया कि उनका चेहरा एक अपराधी से मिलता है और फिर घंटों तक अनावश्यक रूप से थाने में बैठाकर सघन पूछताछ की।

घटना की जानकारी मिलते ही जनपद के सभी पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया है। पत्रकारों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए पुलिस अधीक्षक मऊ से संबंधित कांस्टेबल के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

मिली जानकारी के अनुसार ‘आज’ अखबार के ब्यूरो चीफ अपने किसी कार्य से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान सारयू चौकी, थाना सरायलखंसी क्षेत्र में तैनात एक कांस्टेबल ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि कांस्टेबल ने उनसे कहा कि आपका चेहरा एक वांछित अपराधी से मिलता-जुलता है।

इसी आधार पर कांस्टेबल ने ब्यूरो चीफ को रोक लिया और अपराधियों की तरह पूछताछ शुरू कर दी। पहचान पत्र दिखाने और खुद को वरिष्ठ पत्रकार बताने के बावजूद कांस्टेबल ने उन्हें घंटों तक बैठाए रखा। अनावश्यक सवाल-जवाब और मानसिक उत्पीड़न किया गया। काफी देर बाद जब उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई तब जाकर उन्हें छोड़ा गया।

इस पूरे प्रकरण से आहत ब्यूरो चीफ ने पुलिस प्रशासन से तीखा सवाल पूछा है। उन्होंने कहा कि यदि मेरा चेहरा किसी अपराधी से मिलता है तो पुलिस को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि वह अपराधी कौन है? उसका नाम क्या है? उसका फोटो साझा करें ताकि जनता भी जान सके। बिना किसी आधार के, सिर्फ चेहरा मिलने के नाम पर एक सम्मानित पत्रकार को इस तरह रोका जाना पुलिस की तानाशाही और पत्रकारों को डराने की साजिश है।

उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत छवि खराब करने का प्रयास है, बल्कि पूरे पत्रकार समुदाय का अपमान है।

घटना की सूचना मिलते ही कई पत्रकार संगठनों के पदाधिकारी एकजुट हो गए। सभी ने पुलिस अधीक्षक मऊ से इस मामले की शिकायत की और संबंधित कांस्टेबल पर कठोर कार्रवाई की मांग की।

पत्रकार नेताओं ने कहा कि अगर पुलिस को किसी अपराधी की तलाश है तो उसके पास फोटो और वारंट होना चाहिए। इस तरह राह चलते किसी भी सम्मानित नागरिक को, खासकर पत्रकार को अपराधी बताकर रोकना, उसकी गरिमा का हनन है। इससे पुलिस और पत्रकारों के बीच के संबंध खराब होंगे।

पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के अंदर संबंधित कांस्टेबल पर कार्रवाई नहीं होती है और ब्यूरो चीफ से माफी नहीं मांगी जाती है, तो जनपद के पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल लखनऊ जाकर पुलिस महानिदेशक (DGP) से मिलेगा और पूरे मामले की शिकायत करेगा। साथ ही प्रदेश भर में आंदोलन चलाया जाएगा।

फिलहाल पुलिस अधीक्षक ने मामले को संज्ञान में लेकर जांच का आश्वासन दिया है। देखना होगा कि पुलिस अपने इस बेलगाम सिपाही पर क्या कार्रवाई करती है।

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पवन कुमार पाण्डेय
पवन कुमार पाण्डेय
प्रधान सम्पादक

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