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फार्म-7 में झूठी शिकायत अथवा मिथ्या घोषणा करने पर हो सकती है एक वर्ष तक के कारावास या जुर्माने की सजा

0 निर्वाचक नामावली में नाम हटाने के लिए आवेदन करने से पूर्व तथ्यों की सही जानकारी करें सुनिश्चित।

मऊ। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में निर्वाचक नामावली में नाम सम्मिलित करने अथवा हटाने के संबंध में फार्म-7 के माध्यम से प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदनों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, यदि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) की जांच में फार्म-7 के माध्यम से की गई शिकायत झूठी अथवा मनगढ़ंत पाई जाती है, तो संबंधित आवेदक के विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के अंतर्गत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के प्रावधानों के अनुसार, निर्वाचक नामावली की तैयारी, पुनरीक्षण अथवा शुद्धि तथा किसी प्रविष्टि को निर्वाचक नामावली में सम्मिलित करने या हटाने के संबंध में जानबूझकर झूठा कथन अथवा मिथ्या घोषणा लिखित रूप में करना दंडनीय अपराध है। इसके लिए दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को एक वर्ष तक के कारावास अथवा जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।फार्म-7 में आवेदक द्वारा यह घोषणा भी की जाती है कि उसकी सर्वोत्तम जानकारी एवं विश्वास के अनुसार आवेदन में दी गई जानकारी सत्य है तथा मिथ्या घोषणा किए जाने की स्थिति में वह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के अंतर्गत दंड का भागी हो सकता है। निर्वाचन संबंधी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि उक्त प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इस प्रकार के मामले संज्ञान में आने पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए की गई कार्रवाई से संबंधित कार्यालय को अवगत कराया जाए। इसके अतिरिक्त, आमजन एवं मतदाताओं को जागरूक करने के उद्देश्य से उक्त प्रावधानों का प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
अतः सभी मतदाताओं से अपील है कि निर्वाचक नामावली में नाम सम्मिलित करने अथवा हटाने से संबंधित आवेदन करते समय सही तथ्यों एवं प्रमाणिक जानकारी का ही उल्लेख करें। जानबूझकर झूठी शिकायत या मिथ्या घोषणा करने से बचें तथा निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता बनाए रखने में सहयोग करें।

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पवन कुमार पाण्डेय
पवन कुमार पाण्डेय
प्रधान सम्पादक

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