मऊ।शहरों
में आग की घटनाओं को देखते हुए शासन के निर्देश पर अग्नि सुरक्षा के मानकों को कड़ाई से लागू कराने के लिए मधुबन में बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया गया। एसडीएम सत्यप्रकाश और मुख्य अग्निशमन अधिकारी सीएफओ मऊ के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने कस्बे के प्रमुख मैरिज हॉल, वस्त्रालय, अस्पताल और मिठाई की दुकानों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकांश प्रतिष्ठानों में अग्नि शमन के मानकों में गंभीर कमियां पाई गईं। एसडीएम ने सभी प्रतिष्ठान संचालकों को 7 दिन के भीतर खामियों को दुरुस्त करने का नोटिस जारी किया है। वहीं दूसरी ओर इंदिरा गांधी हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर डुमरी मर्यादपुर में कर्मचारियों और मरीजों को आग से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।
में आग की घटनाओं को देखते हुए शासन के निर्देश पर अग्नि सुरक्षा के मानकों को कड़ाई से लागू कराने के लिए मधुबन में बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया गया। एसडीएम सत्यप्रकाश और मुख्य अग्निशमन अधिकारी सीएफओ मऊ के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने कस्बे के प्रमुख मैरिज हॉल, वस्त्रालय, अस्पताल और मिठाई की दुकानों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकांश प्रतिष्ठानों में अग्नि शमन के मानकों में गंभीर कमियां पाई गईं। एसडीएम ने सभी प्रतिष्ठान संचालकों को 7 दिन के भीतर खामियों को दुरुस्त करने का नोटिस जारी किया है। वहीं दूसरी ओर इंदिरा गांधी हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर डुमरी मर्यादपुर में कर्मचारियों और मरीजों को आग से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।सुबह 11 बजे शुरू हुआ यह अभियान करीब 4 घंटे तक चला। एसडीएम सत्यप्रकाश और सीएफओ मऊ की संयुक्त टीम सबसे पहले श्रंगार अवध मैरिज हॉल पहुंची। टीम ने हॉल में लगे फायर एक्सटिंग्विशर, फायर अलार्म, आपातकालीन निकास द्वार, वाटर हाइड्रेंट और मॉक ड्रिल की व्यवस्थाओं की जांच की। जांच में पाया गया कि हॉल में अग्निशमन यंत्र पुराने और एक्सपायरी डेट के थे। आपातकालीन गेट पर सामान रखा हुआ था। कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में क्या करना है, इसकी कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई थी।
पाकीजा वस्त्रालय और गंगाजली वस्त्रालय पर पर्याप्त अग्निशमन यंत्र नहीं थे, न ही दुकान के अंदर स्मोक डिटेक्टर था। सीएफओ ने बताया कि वस्त्र की दुकानों में आग लगने पर वह तेजी से फैलती है। ऐसे में यहां विशेष सतर्कता जरूरी है। टीम राजी लाइफ मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल पहुंची। अस्पताल में मरीज भर्ती थे, इसलिए यहां जांच और भी गंभीरता से की गई। जांच में पाया गया कि अस्पताल में फायर एक्सटिंग्विशर नहीं है। ऑक्सीजन सिलेंडर के पास चेतावनी के बोर्ड नहीं लगे थे। हाइड्रेंट सिस्टम में प्रेशर नहीं था। नर्सिंग स्टाफ को फायर एक्सटिंग्विशर चलाना भी नहीं आता था।
अंत में टीम मद्धेशिया स्वीट्स पहुंची। मिठाई की दुकानों में गैस सिलेंडर और भट्टियों का प्रयोग होता है। यहां भी अग्निशमन यंत्र न होने, रसोई में वेंटिलेशन की कमी और गैस लाइन के पास ज्वलनशील सामग्री रखे जाने जैसी खामियां मिलीं।
0 एसडीएम ने 7 दिन में सुधार का दिया अल्टीमेटम
मधुबन। जांच के बाद एसडीएम सत्यप्रकाश ने सभी प्रतिष्ठान संचालकों सख्त लहजे में कहा कि जन सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आग की एक छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
उन्होंने सभी संचालकों को नोटिस थमाते हुए कहा कि अगले 7 दिनों के भीतर सभी कमियों को दूर कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। रिपोर्ट में फायर एनओसी, मानक अग्निशमन यंत्र, कर्मचारियों की ट्रेनिंग, आपातकालीन निकास और फायर अलार्म सिस्टम के प्रमाण शामिल हों।
0- इंदिरा गांधी हॉस्पिटल में चला जागरूकता अभियान
मधुबन। इसी क्रम में अग्निशमन विभाग की टीम इंदिरा गांधी हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर डुमरी मर्यादपुर पहुंची। यहां आग से बचाव और उससे निपटने को लेकर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में अस्पताल के डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय और मरीजों के तीमारदारों को आग लगने के कारण, उससे बचाव और आग लगने पर क्या करें- क्या न करें, इसकी जानकारी दी गई। अग्निशमन कर्मियों ने लाइव डेमो के माध्यम से बताया कि विभिन्न प्रकार की आग जैसे बिजली, गैस, तेल में लगने वाली आग को किस प्रकार के एक्सटिंग्विशर से बुझाया जाता है।
टीम ने अस्पताल में मॉक ड्रिल भी कराई। सायरन बजते ही कर्मचारियों ने मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया। अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया गया कि वे हर महीने मॉक ड्रिल कराएं और सभी कर्मचारियों को प्रशिक्षित करें।
अस्पताल के निदेशक ने ई. प्रवीण कुंवर सिंह ने कहा कि मरीजों की जान सबसे कीमती है। हम अग्नि सुरक्षा के सभी मानकों को जल्द से जल्द पूरा करेंगे।











