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ब्रश करने गई 45 वर्षीय महिला की बाढ़ के पानी से भरें पोखरी में डूबने से मौत, गांव में पसरा मातम

मधुबन, मऊ। स्थानीय तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी की बाढ़ से भरें पोखरी जानलेवा साबित हो रहा है। तहसील के देवारा क्षेत्र के धूस गांव में एक दर्दनाक हादसा हो गया। सुबह ब्रश करने के लिए हैंडपंप पर गई 45 वर्षीय महिला की बाढ़ के पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

मृतका की पहचान 45 वर्षीय राधिका पत्नी सत्यनारायण निवासी देवारा धूस के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि राधिका आज सुबह करीब 6 बजे सोकर उठी थीं। रोज की तरह वह घर के पास लगे हैंडपंप पर ब्रश करने के लिए गई ।

लेकिन हैंडपंप के बगल में ही बाढ़ के पानी से भरा एक गहरी पोखरी थी, जिसमें बाढ़ का पानी लबालब भरा हुआ था। अंधेरा और फिसलन होने के कारण उनका पैर फिसल गया और वह सीधे गड्ढे में चली गईं। गहरा पानी होने के कारण वह बाहर नहीं निकल पाईं और डूबने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

परिजनों के अनुसार राधिका काफी देर तक घर नहीं लौटीं तो उन्हें चिंता हुई। परिजन उन्हें खोजने के लिए बाहर निकले। जब वे हैंडपंप के पास पहुंचे तो वहां उन्हें राधिका की चप्पल और जमीन पर फिसलने का निशान दिखाई दिया।

अनहोनी की आशंका से परिजनों के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत आसपास के लोगों को बुलाया और पोखरी में तलाश शुरू कर दी । काफी खोजबीन के बाद गड्ढे के पानी से राधिका का शव बरामद किया गया। शव देखते ही परिवार में कोहराम मच गया। पति सत्यनारायण और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से शव को पानी से बाहर निकलवाया और कब्जे में लेकर पंचनामा किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल मऊ भेज दिया । पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चलेगा, हालांकि प्रथम दृष्टया यह डूबने से मौत का मामला लग रहा है।

गौरतलब है कि मधुबन के देवरांचल क्षेत्र में घाघरा नदी उफान थी। इस कारण सैकड़ों एकड़ फसल डूब चुकी है और गांवों के अगल बगल 4 से 5 फीट तक पानी भरा हुआ है।

ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में  बैरिकेडिंग नहीं की गई है। खतरनाक गड्ढों और पोखरियों के पास कोई चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। अगर प्रशासन ने पहले से सुरक्षा के इंतजाम किए होते तो आज एक महिला की जान नहीं जाती।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मृतक परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और बाढ़ प्रभावित गांवों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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पवन कुमार पाण्डेय
पवन कुमार पाण्डेय
प्रधान सम्पादक

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