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मछली पालन ने बदली देवेंद्र सिंह की जिंदगी, गांव में रहकर बना रहे आत्मनिर्भरता की मिसाल

0 प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का मिला लाभ, आधुनिक तकनीक से 3 टन से अधिक मछली का उत्पादन

0 विभागीय मार्गदर्शन और सरकारी अनुदान से बढ़ी आमदनी, अन्य युवाओं को भी मछली पालन के लिए कर रहे प्रेरित

मऊ। जनपद के विकासखंड मधुबन अंतर्गत ग्राम हकारीपुर पोस्ट तिनहरी मधुबन जनपद मऊ देवेंद्र सिंह ने मछली पालन को रोजगार का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। कभी पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाले देवेंद्र सिंह ने आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर मछली पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। पारंपरिक खेती से परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करना कठिन हो रहा था। रोजगार के लिए बाहर जाने के बजाय उन्होंने अपने गांव में ही स्वरोजगार स्थापित करने का निर्णय लिया। इसी दौरान उन्हें मत्स्य विभाग की योजनाओं और मछली पालन की संभावनाओं की जानकारी मिली। जिला मत्स्य अधिकारी डॉ. विनोद कुमार वर्मा एवं विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन से देवेंद्र सिंह ने मछली पालन शुरू करने का निर्णय लिया। विभाग द्वारा उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) तथा मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जानकारी दी गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में उनका चयन प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत किया गया। योजना के तहत उन्हें मछली पालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें तालाब प्रबंधन, उन्नत प्रजातियों के चयन, संतुलित आहार प्रबंधन और रोग नियंत्रण की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। देवेंद्र सिंह ने अपने तालाब में कतला, रोहू, प्यासी और मृगल जैसी प्रमुख प्रजातियों के साथ फिंगरलिंग्स का पालन शुरू किया। विभागीय मार्गदर्शन में उन्होंने वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीक अपनाते हुए मछली पालन किया। तालाब निर्माण एवं प्रथम वर्ष के इनपुट के लिए उन्हें परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से प्रदान किया गया। महिला लाभार्थियों के लिए यह अनुदान 60 प्रतिशत तक निर्धारित है।विभागीय सहायता, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन से देवेंद्र सिंह का आत्मविश्वास बढ़ा। उन्होंने अपने तालाब का बेहतर प्रबंधन करते हुए लगभग 3 टन से अधिक स्वस्थ मछलियों का उत्पादन किया। मछलियों की बिक्री के लिए उन्हें स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के जनपदों में भी अच्छा बाजार मिला। मऊ के अलावा गाजीपुर, बलिया और आजमगढ़ के व्यापारी भी उनके तालाब से मछली खरीदने पहुंचते हैं। देवेंद्र सिंह ने बताया कि तालाब की लागत, चारा, बिजली और मजदूरी आदि का खर्च निकालने के बाद भी उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि मछली पालन से उन्हें पारंपरिक खेती की तुलना में बेहतर आमदनी हो रही है। देवेंद्र सिंह की सफलता से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। अब वह न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि अन्य ग्रामीण युवाओं को भी मछली पालन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जिला मत्स्य अधिकारी डॉ. विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि विभाग द्वारा किसानों एवं युवाओं को मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों, सरकारी योजनाओं एवं अनुदान की जानकारी दी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने के लिए मत्स्य पालन को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से लाभार्थियों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। देवेंद्र सिंह की सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ लेकर ग्रामीण क्षेत्र में रहकर भी युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं। आधुनिक तकनीक, मेहनत और विभागीय सहयोग से मछली पालन ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का प्रभावी माध्यम बन सकता है। देवेंद्र सिंह ने कहा कि उनका लक्ष्य भविष्य में मछली उत्पादन को और बढ़ाना है। वह आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपने व्यवसाय का विस्तार करना चाहते हैं और आने वाले समय में अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करना चाहते हैं। देवेंद्र सिंह की सफलता जनपद के अन्य बेरोजगार युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने साबित किया है कि सही दिशा, मेहनत, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर गांव में रहकर भी आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई जा सकती है।

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