मधुबन, मऊ। तहसील क्षेत्र जजौली में न्यायालय के आदेश और सरकारी सीमांकन की अवहेलना करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। एसडीएम मधुबन दीपक सिंह के सख्त निर्देश पर थाना मधुबन में रामलीला समिति जजौली के सदस्यों के खिलाफ सरकारी पत्थर उखाड़ने के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
मामला ग्राम जजौली स्थित गाटा संख्या 408 का है। बताया जा रहा है कि इस गाटे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। न्यायालय के आदेशानुसार राजस्व टीम द्वारा मौके पर पैमाइश की गई थी। पैमाइश के बाद सीमांकन कर पक्के सरकारी पत्थर लगाए गए थे, ताकि विवाद का स्थायी समाधान हो सके और दोनों पक्षों को अपनी-अपनी सीमा का पता चल सके।
आरोप है कि विपक्षी पक्षकारों ने राजस्व टीम द्वारा गाड़े गए पक्के सरकारी पत्थरों को अवैध रूप से उखाड़ फेंका। पत्थरों को उखाड़कर फेंकने से सीमांकन पूरी तरह से नष्ट हो गया और विवाद फिर से भड़कने की स्थिति बन गई।
इस घटना की जानकारी मिलने पर राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और पूरे मामले की रिपोर्ट एसडीएम मधुबन दीपक सिंह को सौंपी। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि सरकारी पत्थरों को जानबूझकर और षड्यंत्र के तहत उखाड़ा गया है, जो न्यायालय के आदेश की अवहेलना है।
पुलिस का कहना है कि इस मामले में रामलीला समिति जजौली के सदस्यों की भूमिका की जांच की जा रही है। जो भी लोग इस कृत्य में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
इस मामले को लेकर एसडीएम मधुबन दीपक सिंह ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि, “न्यायालय और शासकीय आदेशों की अवहेलना अथवा सरकारी राजस्व टीम द्वारा लगाए गए पत्थरों और मेड़ के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ अक्षम्य अपराध है। ऐसे कृत्यों में लिप्त अराजक तत्वों के खिलाफ प्रशासन द्वारा कड़ी विधिक कार्रवाई प्रचलन में लायी जायेगी और दोबारा पत्थर लगाने का पूरा सरकारी खर्च भी दोषियों से ही वसूला जाएगा।”
एसडीएम ने कहा कि प्रशासन किसी भी कीमत पर कानून व्यवस्था से खिलवाड़ नहीं होने देगा। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न कर सके।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से इस गाटे को लेकर विवाद चल रहा था, न्यायालय के आदेश पर पैमाइश हुई थी, लेकिन कुछ लोगों ने जानबूझकर पत्थर उखाड़कर विवाद को फिर से बढ़ाने की कोशिश की। प्रशासन की इस कार्रवाई से ऐसे अराजक तत्वों पर लगाम लगेगी। वहीं, राजस्व विभाग की टीम जल्द ही मौके पर दोबारा जाकर पत्थर लगाने की तैयारी कर रही है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार पत्थर लगाने का पूरा खर्च दोषियों से ही वसूला जाएगा।
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