मऊ। यूजीसी के नए नियमों और आरक्षण व्यवस्था के विरोध में गुरुवार को सवर्ण एकता मंच के तत्वावधान में सवर्ण समाज के लोगों ने मऊ कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के युवा, अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना था कि यूजीसी के नए प्रावधान और आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था से सवर्ण समाज के मेधावी छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है। योग्यता के बावजूद उन्हें उच्च शिक्षा और नौकरियों में अवसर नहीं मिल पा रहा है।
0 योग्यता को मिले प्राथमिकता…
सवर्ण एकता मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि आरक्षण का आधार आर्थिक होना चाहिए, न कि जातिगत। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभा का हनन हो रहा है। एक तरफ मेधावी छात्र 90 प्रतिशत अंक लाकर भी प्रवेश से वंचित रह जाते हैं, वहीं कम अंक वाले छात्रों को आरक्षण के नाम पर प्रवेश मिल जाता है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
मंच के नेताओं ने कहा कि यूजीसी द्वारा लाए गए नए नियम सवर्ण समाज के छात्रों के हितों के खिलाफ हैं। इन नियमों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
0 राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन…
विरोध प्रदर्शन के बाद सवर्ण एकता मंच ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जाए और आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू किया जाए। साथ ही यूजीसी के सवर्ण विरोधी नियमों को रद्द किया जाए।ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि सवर्ण समाज के गरीब छात्रों के लिए भी विशेष छात्रवृत्ति और सुविधाओं की व्यवस्था की जाए, ताकि वे भी मुख्यधारा में आगे बढ़ सकें। इस विरोध प्रदर्शन में सवर्ण एकता मंच के तमाम नेता और प्रबुद्ध जन रहें।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।










