मऊ। जनपद के मधुबन तहसील क्षेत्र के बैरियाडीह गांव के राजभर बस्ती में पिछले लगभग 20 सालों से जल निकासी की गंभीर समस्या बनी हुई है। इस समस्या से निजात पाने के लिए ग्रामीणों ने अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाई, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। समस्या से आजिज आकर आज ग्रामीणों ने गांव में प्रदर्शन कर प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि नाली और नाले के अभाव में घरों का गंदा पानी सड़कों पर बहता है। थोड़ी सी बारिश में ही जलभराव हो जाता है। इससे आने-जाने में काफी परेशानी होती है। बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कत होती है, वहीं बुजुर्गों को भी फिसलन के कारण गिरने का डर बना रहता है।
राजभर बस्ती में जल निकासी न होने के कारण गंदे पानी का जमावड़ा लगा रहता है। यह जमावड़ा मच्छरों का प्रजनन स्थल बन गया है। इसके कारण गांव में मलेरिया, डेंगू और डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है। कई बार ग्रामीण बीमार भी पड़ चुके हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक शिकायत की गई है। प्रधान से लेकर विधायक और सांसद तक से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। धरातल पर कोई काम नहीं हुआ।
आज इसी आक्रोश के चलते राजभर बस्ती के सैकड़ों महिला-पुरुष एकजुट हुए और गांव में प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने नारेबाजी की और प्रशासन से जल्द से जल्द नाली निर्माण कराने की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे मनोज साहनी ने कहा कि हम लोग 20 साल से इस नरक में रहने को मजबूर हैं। कोई सुनने वाला नहीं है। चुनाव के समय सभी नेता आते हैं और बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब भूल जाते हैं। इस बार यदि हमारी मांग नहीं मानी गई तो हम लोग ब्लॉक मुख्यालय और तहसील पर धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
अनिरुद्ध राजभर ने कहा कि जल निकासी न होने से हम लोगों का जीना दूभर हो गया है। घरों का पानी घरों में ही घुस जाता है। बदबू के कारण रहना मुश्किल हो गया है।
सुनील साहनी ने कहा कि कई बार प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन अधिकारी जांच के नाम पर खानापूर्ति करके चले जाते हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के अंदर नाली निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे तहसील मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होगे ।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से रामप्रवेश साहनी , हरिमोहन साहनी ,मनोज साहनी, अनिरुद्ध राजभर, सुनील साहनी, रघुवर साहनी, राजेंद्र साहनी, हरिश्चंद्र राजभर, नागेश्वर साहनी, कुसुम सहनी, गायत्री राजभर, सावित्री देवी, लैला देवी, सोनू राजभर, ओम प्रकाश साहनी, संजय साहनी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण रहें।










