मऊ। जनपद की मधुबन पुलिस अपनी कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में है। गंभीर मामलों में भी पुलिस की संवेदनहीनता सामने आ रही है। ताजा मामला बलवंत मल्ल कटघराशंकर की मौत का है, जिसमें दो महीने बीत जाने के बाद भी मधुबन पुलिस ने जांच के लिए विसरा नहीं भेजा है।मृतक के भाई यशवंत मल्ल ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पर मिलीभगत का बड़ा आरोप लगाया है।
मृतक के भाई यशवंत मल्ल के अनुसार, उनके भाई बलवंत मल्ल को 10 जुलाई को पेट दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतहपुर मंडाव में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि वहां तैनात चिकित्सक की लापरवाही से उनके भाई की मौत हो गई।
यशवंत मल्ल का आरोप है कि चिकित्सक ने पेट दर्द के इलाज के दौरान 6 इंजेक्शन लगाए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अपने सरकारी कागजात में केवल 2 इंजेक्शन लगाना दर्ज किया है। इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद बलवंत मल्ल की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने इस मामले में चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मधुबन थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और विसरा सुरक्षित रखा। नियमानुसार विसरा को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाना था, ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि घटना को दो महीने से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक मधुबन पुलिस ने विसरा को जांच के लिए नहीं भेजा है। पीड़ित भाई यशवंत मल्ल का कहना है कि वह लगातार थाने के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे टाल दिया जाता है।
यशवंत मल्ल ने आरोप लगाया कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत के कारण ही विसरा नहीं भेजा जा रहा है, ताकि चिकित्सक की लापरवाही को छुपाया जा सके।
न्याय न मिलता देख मृतक के भाई यशवंत मल्ल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उच्च अधिकारियों से इस मामले की शिकायत की है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी चिकित्सक और लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में जब सीओ मधुबन दिनेश दत्त मिश्र से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में है। जांच की जा रही है और जांच के बाद लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।












