मऊ, उ.प्र.। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में भवन निर्माण और नक्शा स्वीकृति की व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चैरिटेबल संगठन सिविल इंजीनियर एंड आर्किटेक्चर मऊ के तत्वावधान में सिविल इंजीनियरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मास्टर प्लान कार्यालय में हो रही अनियमितताओं की शिकायत की है। इंजीनियरों का आरोप है कि मास्टर प्लान में जूनियर इंजीनियर (जेई) के पद पर सिविल इंजीनियर की जगह पीडब्ल्यूडी के एक मैकेनिकल इंजीनियर को नियुक्त कर दिया गया है, जो नियमों के पूरी तरह खिलाफ है।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि भवन का नक्शा पास करना एक तकनीकी कार्य है, जिसके लिए सिविल इंजीनियरिंग की योग्यता और अनुभव होना अनिवार्य है। मैकेनिकल इंजीनियर को भवन निर्माण, स्ट्रक्चर, लोड, सेटबैक और मास्टर प्लान के नियमों की जानकारी नहीं होती। इसके बावजूद वही अधिकारी भवनों के नक्शे पास कर रहा है, जिससे पास किए गए नक्शों की वैधता पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। ज्ञापन में विभाग पर बहुत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इंजीनियरों का कहना है कि विभाग द्वारा जानबूझकर भवन निर्माण हेतु मानचित्रों को रोका जा रहा है। विभाग में तैनात कर्मचारियों द्वारा अधिक लाभ कमाने की कोशिश की जा रही है। नक्शा पास कराने के लिए लोगों को महीनों तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
इस वजह से जनता में विभाग के खिलाफ काफी रोष है। लोग नक्शा स्वीकृति न मिलने से परेशान हैं। कई लोगों का भवन निर्माण कार्य बीच में रुका हुआ है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
संगठन ने आंकड़े देते हुए बताया कि मानचित्र स्वीकृत विभाग में पिछले साल की तुलना में इस साल 50 प्रतिशत की गिरावट आई है। यानी आधे से भी कम नक्शे पास हो रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई है। जब सिविल इंजीनियर इस पद पर था, तब नक्शे समय से पास होते थे, अब व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ गई है।
इंजीनियरों ने कहा कि पीडब्ल्यूडी के मैकेनिकल इंजीनियर द्वारा पास किए गए नक्शे भविष्य में कानूनी विवाद में फंस सकते हैं। यदि किसी भवन में कोई दुर्घटना होती है या नक्शा गलत पाया जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? यह सवाल विभाग के सामने खड़ा है।
सिविल इंजीनियर संगठन ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मऊ के मास्टर प्लान एवं भवन निर्माण कार्यालय में तत्काल प्रभाव से नियम अनुसार योग्य सिविल इंजीनियर अथवा अधिकृत टाउन प्लानिंग अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाए, ताकि भवन निर्माण और नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया पारदर्शी एवं नियम अनुसार संचालित हो सके।
इस अवसर पर चैरिटेबल सिविल इंजीनियर संगठन के जिला अध्यक्ष जाहिद हसन और महेंद्र शर्मा ने बयान देते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि व्यवस्था को सही करने के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगा। उन्होंने जिलाधिकारी से इस पूरे मामले की जांच कराकर दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की भी मांग की है।
Author Profile
- प्रधान सम्पादक
Latest entries
मऊNovember 6, 2026एसडीएम मधुबन के निर्देश पर अवैध मिट्टी खनन पर बड़ी कार्रवाई: संयुक्त टीम ने 03 ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़कर की सीज
मऊNovember 6, 2026धनतेरस पर झुमकर लोगों ने किया खरीददारी
मऊNovember 6, 2026जिलाधिकारी की अध्यक्षता में किसान सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड घोसी के प्रबंध समिति की बैठक संपन्न
मऊNovember 6, 2026फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति किसानों को जागरूक करने हेतु प्रचार वाहन रवाना












