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धार्मिक रामलीला जजौली में रावण, मेघनाथ और कुंभकरण वध का भव्य मंचन, मुख्य अतिथि डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने आरती कर किया शुभारंभ

मधुबन, मऊ। धार्मिक रामलीला जजौली, मधुबन के तत्वावधान में चल रही ऐतिहासिक रामलीला में बीती रात अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक रावण, मेघनाथ और कुंभकरण वध का भव्य और सजीव मंचन किया गया।

रामलीला मंचन का शुभारंभ मुख्य अतिथि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतहपुर मंडाव के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार पांडेय द्वारा भगवान श्रीराम की आरती उतार कर किया गया। जैसे ही डॉ. पांडेय ने दीप प्रज्ज्वलित कर आरती की, पूरा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।

मुख्य अतिथि डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने कहा कि रामलीला सिर्फ एक मंचन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति का जीवंत दर्शन है। भगवान राम का जीवन हमें मर्यादा, त्याग और सत्य के मार्ग पर चलना सिखाता है। उन्होंने कहा कि रावण कितना भी शक्तिशाली और ज्ञानी क्यों न हो, यदि उसमें अहंकार है तो उसका विनाश निश्चित है। उन्होंने जजौली रामलीला समिति के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को हमारी संस्कृति से जोड़ते हैं।

आज की लीला सबसे महत्वपूर्ण थी, इसलिए हजारों की संख्या में दर्शक जजौली रामलीला प्रांगण में उमड़ पड़े थे।

सबसे पहले छह महीने सोने वाले विशालकाय कुंभकरण के युद्ध का मंचन हुआ। वानर सेना से उसका भीषण युद्ध और भगवान राम द्वारा उसका वध का दृश्य देख दर्शक रोमांचित हो उठे।

इसके बाद मायावी शक्तियों के स्वामी इंद्रजीत मेघनाद वध की लीला हुई। मेघनाद ने अपनी मायावी शक्ति से लक्ष्मण जी को मूर्छित कर दिया, जिसके बाद हनुमान जी संजीवनी लाए। बाद में लक्ष्मण जी ने शक्ति साधना कर रहे मेघनाद का वध किया। इस दृश्य ने सभी को भावुक कर दिया।

अंत में दशानन रावण और भगवान राम के बीच हुए 21 दिनों तक चले घोर युद्ध का मंचन हुआ। जब भगवान राम ने अपने ब्रह्मास्त्र से रावण की नाभि में तीर मारकर उसका वध किया, तो पूरा प्रांगण जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा और विजयादशमी का वास्तविक उत्सव मनाया गया।

कलाकारों की सजीव अभिनय, संवाद और युद्ध के दृश्यों ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक खुद को त्रेतायुग में महसूस करने लगे।

इस अवसर पर धार्मिक रामलीला समिति जजौली के अध्यक्ष, मंत्री, कोषाध्यक्ष सहित समस्त पदाधिकारी और सैकड़ों की संख्या में नारायण भक्त, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे मौजूद रहे। समिति ने बताया कि जजौली की यह रामलीला 40 वर्षों से भी अधिक समय से लगातार आयोजित हो रही है।

 

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पवन कुमार पाण्डेय
पवन कुमार पाण्डेय
प्रधान सम्पादक

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