मऊ। देव श्री न्यास, एवं विद्या तिवारी मेमोरियल फाउण्डेशन ट्रस्ट, गजियापुर, मऊ के तत्वाधान में डी.सी.एस.के. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मऊ के सभागार में रविवार को अपराह्न 11 बजे से महान मधुबन क्रांति के नायक स्व. रामसुंदर पांडेय जी के जीवन पर आधारित, तारकेश्वर मिश्र राही के द्वारा रचित काव्य पुस्तक ‘क्रांतिदूत’ का लोकार्पण एवं सम्मान समारोह संपन्न हुआ। समारोह का आरंभ मां सरस्वती एवं रामसुंदर पांडेय जी के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। इसके बाद डॉ. सूर्यभूषण द्विवेदी जी ने मां सरस्वती की वंदना की। कार्यक्रम में अतिथियों के पुष्पसम्मान के साथ प्रसिद्ध कवि एवं राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कवि मुक्तेश्वर परासर को सम्मानित किया गया। डॉ. सूर्यभूषण द्विवेदी द्वारा ‘शिवतांडव’ का सुंदर पाठ हुआ।
सम्मान समारोह के बाद कथाकार व संपादक सुमित उपाध्याय ने ” क्रांति दूत” पुस्तक का परिचय वक्तव्य देते हुए पुस्तक की वर्तमान प्रासंगिकता पर चर्चा की एवं तारकेश्वर मिश्र राही जी के जीवन व उनके संघर्ष को याद किया। प्रसिद्ध पर्यावरणविद पंकज तिवारी ने पुस्तक से चयनित अंश का अदभुत पाठ किया।
व्यक्तव्य सत्र का प्रारंभ पूर्व विधायक अमरेश पांडेय के व्यक्तव्य से हुआ । उन्होंने अपने महान स्वर्गीय पिता क्रांतिकारी स्व. रामसुंदर पांडेय से जुड़े संस्मरणों को बताया व उनके अंतिम वक्तव्य को दोहराया कि “अमरेश तुम राजनीति में न आना, मगर यदि आना ही पड़े तो रामसुंदर पांडेय के सफेद कुर्ते पर कोई दाग न लगने देना”।
व्यक्तव्य सत्र को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ साहित्यकार मनोज सिंह जी ने मधुबन क्रांति को पूरे देश के समक्ष प्रस्तुत करने पर बल दिया व नयी पीढ़ी को क्रांति की विचारधारा से जोड़ने के प्रयास हेतु अमित पांडेय जी को बधाई दी। व्यक्तव्य सत्र का समापन अर्थशास्त्र के वरिष्ठ आचार्य एवं विद्वान प्रो. चंद्रप्रकाश राय जी ने करते हुए कहा कि यह पुस्तक हमें आजादी के समय के जीवन की दुश्वारियों से परिचय कराती है और बताया कि मधुबन के कच्चे रास्ते से निकलकर कैसे एक क्रांतिकारी ने राष्ट्र सेवा के पथ पर अपना संपूर्ण जीवन अर्पित कर दिया। रामसुंदर पांडेय जी कभी पद के मोहताज नहीं रहे उनके ध्यान में मात्र अपने क्षेत्र का विकास व शिक्षा की समस्याओं दूर करना था।”
वक्तव्य कार्यक्रम के उपरांत काव्य गोष्ठी का आरंभ करते हुए प्रसिद्ध कवयित्री अनुप्रिया राय ‘मधु’ ने अपनी कविता “जीवन को चुप्पियों ने बदल डाला” व “कई बार खामोशियां बहुत कुछ बता देती हैं” का पाठ किया। समाजशास्त्र के असि. प्रो. सूर्यभूषण द्विवेदी ने “हम युवा शक्ति, हम युवा राष्ट्र”, “नया भगीरथ” एवं ‘बिंदियाँ’ जैसी प्रसिद्ध कविताएं सुनायीं। युवा कवि सुमित उपाध्याय ने अपनी कविता “आदमी है किस कदर उलझा हुआ”, एवं “अतीत का पुल’ सुनाया। वरिष्ठ गीतकार जितेन्द्र मिश्र ‘काका’ जी ने “खुशियों के दिन भी हमसे संभाले नहीं गये” एवं अपना मनभावक गीत “फीकी फीकी रही दिवाली, होली अबकी बार” सुनाकर सभा की शोभा बढ़ा दी । वरिष्ठ साहित्यकार मनोज सिंह ने “जरूरत हो तो अपने जान की बाजी लगाते हैं” एवं “हम रोज बार- बार जहर पीते हैं…” सुनायी। वरिष्ठ कवि श्री मृत्युंजय तिवारी जी ने अपना रचना ” तुम जुदा होकर भी मेरी राहों में हो”, ” पेड़ से निकली कुर्सियां किसी की नहीं होती” एवं ” नफ़रतों की चल रही है आंधियाँ” सुनायीं। साहित्यकार रामस्नेही राय जी ने अपनी प्रतिनिधि रचना ” प्राण जिनने दिए हैं वतन के लिए, शब्द छोटे हैं उनके नमन के लिए” सुनाकर क्रांति की अलख को पुनर्जीवित किया । प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास द्वारा सम्मानित युवा कवि मुक्तेश्वर पराशर जी ने अपनी कविता ” पिता के मार्ग पर, आदर्श पर चलता है जब बेटा, तो सच्चे अर्थ में पिता को तार देता है”, एवं ” देख लेंगे शहीदों की अर्थी को जब, तब तिरंगे की कीमत को समझ जायेंगे” सुनाकर जन-जन को मोह लिया। मंच का संचालन कर रहे वरिष्ठ गजलकार बृजेश गिरी जी ने अपनी ग़ज़ल ” गर वो कुछ न कर सकते तो, कम से कम हौसला देते” एवं ” प्यार के मायने हम प्यार ही समझते हैं” सुनाईं ।
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ साहित्यकार एवं लोकप्रिय कवि डॉ कमलेश राय ने महान मधुबन क्रांति एवं रामसुंदर पांडेय के बलिदान को स्मरण करते हुए अपना काव्य संदेश अपनी कविता ” देश के ना केहू डिगा पाई, जबले बा संविधान का पन्ना” दिया । उन्होंने अपने गीत ” तोहरा बिन भोर कबो भोर ना बुझाइल” एवं ” हम पतझर में प्रीत जगाके, कांटन के कोरन कोरन पर, फूलन क इतिहास लिखीलां” सुनाकर मानो हर जन को रस एवं शब्द के सागर में उतार दिया ।
अध्यक्षीय काव्यपाठ करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार रामनिवास राय ने क्रांति दूत” पुस्तक के अंश पढ़ राजनीति के वर्तमान एवं भविष्य की परिस्थिति पर चर्चा की एवं भले लोगों को राजनीति में आने को आमंत्रित किया। उन्होंने अपनी व्यंग्य रचना ” जनतंत्र ”
एवं ” रूपसी “, ” नयी कविता” पढ़ी ।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए देव श्री न्यास के संस्थापक, वरिष्ठ साहित्यकार, भाषाविद् प्राचार्य डॉ शर्वेश पाण्डेय ने समाज के सभी गणमान्य लोगों की उपस्थिति हेतु आभार प्रकट करते हुए बताया कि शब्द कैसे आपकी पीड़ा को हर लेते हैं इसका प्रत्यक्ष उदाहरण तारकेश्वर मिश्र राही हैं और उनके माध्यम से महान क्रांतिकारी, बलिदानी राम सुंदर पाण्डेय जी एवं सेनानियों को याद किया एवं कहा कि यह क्षण इतिहास में दर्ज होने जा रहा है ।
कार्यक्रम का कुशलतापूर्वक संचालन बृजेश गिरी जी ने किया । कार्यक्रम का अंत राष्ट्रगान से हुआ । इस अवसर पर राणा सिंह , विजय प्रताप सिंह, देवेंद्र मिश्र, के . के पांडेय, देवेश राय, गिरीश नारायण सिंह, रमन पाण्डेय, अवध बिहारी यादव, डॉ एस. सी. तिवारी, सुरेंद्र राय, राम जपित पाण्डेय, हंसनाथ तिवारी, संजय श्रीवास्तव, शुभम सिंह आदि सैंकड़ों गणमान्य जन उपस्थित रहे ।










