Home मऊ इंटरलॉकिंग कार्य में मानकों की अनदेखी का आरोप, उच्च अधिकारियों से शिकायत

इंटरलॉकिंग कार्य में मानकों की अनदेखी का आरोप, उच्च अधिकारियों से शिकायत

मऊ। ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा की निधि से जनपद  के मधुबन क्षेत्र के जजौली और परसूरामपुर गांव को जोड़ने के लिए चल रहे इंटरलॉकिंग कार्य में मानकों की अनदेखी का आरोप लगा है। लगभग 23 लाख रुपये की लागत से हो रहे इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गांव के लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मंत्री ए.के. शर्मा को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
बता दे कि जजौली और परसूरामपुर दो गांवों के बीच वर्षों से रास्ता बदहाल था। बरसात में कीचड़ और आवागमन की दिक्कत को देखते हुए मंत्री ए.के. शर्मा की निधि से यहां इंटरलॉकिंग सड़क स्वीकृत की गई है। कार्य की लागत करीब 23 लाख रुपये बताई जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि काम शुरू होने के साथ ही सामग्री और निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही बरती जा रही है। उनका कहना है कि इंटरलॉकिंग के नीचे बेस तैयार करने में गिट्टी और बालू की तय मोटाई नहीं रखी जा रही। पुरानी मिट्टी को हटाए बिना ही ऊपर से इंटरलाकिंग टाइलें बिछाई जा रही हैं। साथ ही सीमेंट और रेत के मिश्रण का अनुपात भी मानक के अनुसार नहीं है।
जितेन्द्र तिवारी, रामदुलारे आदि ने एक लिखित शिकायत सीएम योगी आदित्यनाथ और मंत्री ए.के. शर्मा को भेजी है। शिकायत में कहा गया है कि “मंत्री जी की मंशा गांवों को बेहतर सड़क देने की थी, लेकिन ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारी मिलीभगत कर सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। अगर अभी रोक नहीं लगी तो छह महीने में ही सड़क उखड़ जाएगी।”
ग्रामीणों ने मौके पर जाकर काम का वीडियो और फोटो भी शिकायत के साथ संलग्न किए हैं। उनका कहना है कि कई बार ठेकेदार के कर्मचारियों से बात की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद मजबूर होकर उच्च अधिकारियों से शिकायत करनी पड़ी।
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मंत्री ए.के. शर्मा विकास कार्यों को लेकर हमेशा गंभीर रहते हैं। उनकी निधि से क्षेत्र में कई सड़कें और विकास कार्य हुए हैं। इसलिए ग्रामीण चाहते हैं कि इस कार्य में भी पारदर्शिता बनी रहे।
शिकायतकर्ताओं ने मांग किया कि निर्माण कार्य को तत्काल रोककर तृतीय पक्ष से जांच कराई जाए। सामग्री की लैब टेस्टिंग कराई जाए। दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई हो।मानक के अनुसार नया सिरे से कार्य कराया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिन में जांच नहीं हुई और कार्य की गुणवत्ता नहीं सुधरी तो वे धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

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पवन कुमार पाण्डेय
पवन कुमार पाण्डेय
प्रधान सम्पादक

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