मऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशन में संचालित “एक जनपद–एक नदी” अभियान के अंतर्गत जनपद मऊ की खड़िया नाला के पुनरुद्धार एवं कायाकल्प का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। खड़िया नाला को नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) द्वारा प्रकाशित “Atlas of Rivers in Uttar Pradesh” में जनपद मऊ की एक नदी के रूप में अंकित किया गया है।
खड़िया नाला का उद्गम गाढ़ा ताल मुस्तफाबाद–खालिपुर से होता है तथा यह लगभग 9.02 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए आठ ग्राम पंचायतों की सीमाओं से होकर प्रवाहित होती है और अंततः तमसा नदी में मिल जाती है। वर्तमान में इसके पुनरुद्धार एवं कायाकल्प का कार्य सिंचाई विभाग द्वारा तीव्र गति से कराया जा रहा है, जिसे शीघ्र ही पूर्ण कर लिया जाएगा।
कार्य की प्रगति का जायजा लेने हेतु जिला गंगा समिति, मऊ के जिला परियोजना अधिकारी डॉ. हेमंत यादव ने खड़िया नाला का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों एवं ग्राम प्रधानों से संवाद कर कार्य की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश ने पुनरुद्धार कार्य पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2025 में आये मोथा चक्रवात के कारण 30 से अधिक गांवों की रबी एवं खरीफ की फसलें जलभराव से प्रभावित हुई थीं। कई गांवों में सप्ताहों तक पानी भरा रहने से किसानों को भारी नुकसान हुआ था। उन्होंने कहा कि खड़िया नाला के पुनरुद्धार से जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी, जिससे भविष्य में जलभराव की समस्या कम होगी और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने सिंचाई विभाग द्वारा कराए जा रहे कार्य की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
ग्राम पंचायत मुस्तफाबाद के संजय सिंह ने भी पुनरुद्धार कार्य को अपेक्षाओं के अनुरूप बताते हुए इसकी प्रशंसा की। अन्य ग्रामीणों ने भी कार्य की गुणवत्ता एवं प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. हेमंत यादव ने ग्रामीणों से जैविक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से जल स्रोत प्रदूषित होते हैं। यदि किसान जैविक खेती को अपनाते हैं, तो नालों एवं नदियों में प्रवाहित होने वाला पानी अपेक्षाकृत स्वच्छ रहेगा, जिससे जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
उन्होंने ग्रामीणों से यह भी अनुरोध किया कि मछली पकड़ने के लिए खड़िया नाला में अस्थायी बांध (बंधे) न बनाएं, क्योंकि इससे जलधारा का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध होता है। जल प्रवाह में बाधा आने से नाले के पारिस्थितिक तंत्र एवं पुनरुद्धार कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर अखिलेश कुमार यादव ने बताया कि खड़िया नाला के पुनरुद्धार का कार्य शीघ्र ही पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके उपरांत नाले के किनारे वृक्षारोपण एवं अन्य संरक्षण संबंधी कार्य भी निर्धारित योजना के अनुसार संपन्न कराए जाएंगे।
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- प्रधान सम्पादक
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