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घाघरा के रौद्र रूप से देवरांचल में दूसरी बार तबाही की आहट, दर्जनों गांवों में दहशत,खतरे के निशान से मात्र 81 सेमी नीचे जलस्तर

रिपोर्ट: समाचार सम्पादक रिंकू पाण्डेय

मऊ। पड़ोसी देश नेपाल द्वारा एक महीने के भीतर दूसरी बार भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण मधुबन तहसील क्षेत्र के देवांचल में घाघरा नदी एक बार फिर उफान पर है। नदी के बढ़ते जलस्तर ने देवरांचल के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। बरसात के इस मौसम में बारिश न होने की मार झेल रहे किसानों के लिए घाघरा का यह बढ़ता रुख दोहरी आफत बनकर आया है। परसिया-जयरामगिरी हाहानाला हेड पर तैनात कर्मचारियों के अनुसार बुधवार सुबह 8 बजे नदी का जलस्तर 65.24 मीटर रिकॉर्ड किया गया था, जो खतरे के निशान (66.31 मीटर) से 1.07 मीटर नीचे था। लेकिन जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी जारी है। पिछले 24 घंटे के भीतर नदी का जलस्तर 14 सेंटीमीटर और बढ़ गया, जिसके बाद गुरुवार सुबह आठ बजे जलस्तर 65.38 मीटर पर पहुंच गया था। गुरुवार की शाम 65.40 और शुक्रवार की सुबह 65.50 सेमी अब घाघरा खतरे के निशान से महज 81सेमी नीचे बह रही है और बढ़ाव का यह सिलसिला लगातार जारी है। जलस्तर में तेजी से हो रही इस वृद्धि के कारण तटवर्ती गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों के डूबने का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि आवाजाही के लिए उन्हें जल्द ही नावों का सहारा लेना पड़ेगा। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल नदी में कटान की गति धीमी है, लेकिन खतरा पूरी तरह बरकरार है। पिछले साल इसी इलाके के बिंदटोलिया गांव की एक बड़ी आबादी घाघरा की तेज धारा में समा गई थी, जबकि दुबारी के विसुन के पुरवा में बड़े पैमाने पर उपजाऊ कृषि भूमि नदी में विलीन हो गई थी। इतिहास दोहराने के डर से ग्रामीण सहमे हुए हैं। तहसील के उत्तरी छोर पर स्थित दर्जनों गांव और पुरवे बाढ़ के पानी की चपेट में आने लगे हैं। इनमें प्रमुख रूप से चक्कीमूसाडोही, खैरा, भगत का पुरा, धूस देवारामनमन का पुरा, खैरा देवारा, सुन्नर का पुरा, पब्बर का पुरा, हरिलाल का पुरा, विसुन का पुरा, नंदजी का पुरा, बिंदटोलिया, बैरिकंटा और बिंदर का पुरा शामिल हैं। बीते 31 अगस्त की शाम से नदी के पानी में शुरू हुई यह बढ़ोतरी यदि जल्द नहीं रुकी, तो मैदानी इलाकों में स्थित तालरतोय ताल से जुड़ाव होने के कारण बाढ़ का पानी खेतों में भर जाएगा। इससे किसानों की बची धान की फसल भी पूरी तरह डूबकर नष्ट हो जाएगी।

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