मऊ। पूर्व राज्य मंत्री उत्पल राय ने मंगलवार को एक बड़ा बयान देकर स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा उनके साथ 2012 से ही है और पार्टी को अब एक बार फिर स्थानीय विधायक बनाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।उत्पल राय ने पत्रकारों से बातचीत में अपने राजनीतिक सफर को याद किया। उन्होंने बताया कि 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने काग्रेस सपा गठबंधन से चुनाव लड़ा था और उस समय उन्हें 27 हजार मत मिले थे। यह आंकड़ा उनके लिए आज भी गर्व की बात है । यह दर्शाता है कि क्षेत्र की जनता ने उन पर भरोसा जताया था।उन्होंने आगे कहा कि 2016 में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुरोध पर उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली थी। उनका मकसद था संगठन को मजबूत करना और क्षेत्र के विकास में भाजपा के मंच से योगदान देना। सदस्यता लेने के बाद उन्होंने बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक पार्टी के लिए काम किया। लेकिन इसके बाद भी उन्हें चुनावी मौका नहीं मिला। उत्पल राय ने कहा कि 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। दोनों बार उन्होंने कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के प्रत्याशी को जिताने के लिए पूरी ताकत से प्रचार किया। उनका आरोप है कि बाहर से लाए गए नेताओं को तरजीह देने के कारण स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई। अब 2027 के चुनाव को देखते हुए उन्होंने फिर एक बार पार्टी नेतृत्व से मांग की है कि मधुबन सीट पर स्थानीय चेहरे को मौका दिया जाए। उन्होंने कहा कि बाहरी प्रत्याशी लाने से कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है और जमीन से जुड़ा नेता ही क्षेत्र की समस्याओं को बेहतर समझ सकता है।उत्पल राय ने कहा कि पिछले 10 सालों में उन्होंने क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क को लेकर लगातार आवाज उठाई है। अगर पार्टी उन्हें मौका देती है तो वे मधुबन को विकास के नए मॉडल के रूप में पेश करेंगे। उनके इस बयान के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई कार्यकर्ता उनके समर्थन में आए हैं और कह रहे हैं कि अब समय आ गया है जब पार्टी को जमीनी नेता पर भरोसा करना चाहिए। अब देखना होगा कि संगठन इस मांग पर क्या फैसला लेता है।
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