Home मऊ डीएम,एसपी ने बाढ़ का लिया जायजा, मातहतों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

डीएम,एसपी ने बाढ़ का लिया जायजा, मातहतों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

मऊ। जनपद के मधुबन तहसील क्षेत्र के घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी और कटान की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन और पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने गुरुवार दोपहर बाढ़ चौकियों और तटबंधों का निरीक्षण किया। उनके साथ सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहें।
निरीक्षण के दौरान सबसे पहले डीएम और एसपी ने विन्टोलिया गांव के पास घाघरा के तटबंध का जायजा लिया। यहां नदी का पानी तेज बहाव के साथ तटबंध के करीब पहुंच गया है और कुछ स्थानों पर कटान भी शुरू हो गई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले 24 घंटे में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है । यदि ऊपरी क्षेत्रों में बारिश होती है तो जलस्तर और बढ़ सकता है। डीएम आनंद वर्द्धन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कटान वाले संवेदनशील स्थानों पर तत्काल बोरा-बैग, बालू और बोल्डर की व्यवस्था की जाए। रात-दिन निगरानी के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए और जेसीबी मशीनें मौके पर स्टैंडबाय रखी जाएं।
इसके बाद अधिकारियों का काफिला मोहन सेतू पहुंचा। सेतू के दोनों छोर पर पानी का दबाव बढ़ा हुआ है। कटान को रोकने के लिए बैग जेसीबी एलर्ट रखी गई है।
निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक बाढ़ चौकी दुबारी और बाढ़ चौकी सुग्गीचौरी भी पहुंचे। दोनों चौकियों पर तैनात कर्मियों से बाढ़ से जुड़ी तैयारियों, राहत सामग्री, नावों की उपलब्धता और संचार व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। डीएम ने निर्देश दिए कि प्रत्येक बाढ़ चौकी पर मेडिकल किट, लाइफ जैकेट, टॉर्च, वायरलेस सेट और पर्याप्त खाद्यान्न पहले से उपलब्ध रखा जाए। ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों की जानकारी पहले से दी जाए और पशुओं के लिए चारा-पानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
इस दौरान एसडीएम मधुबन दीपक सिंह, तहसीलदार ज्ञानेंद्र यादव, नायब तहसीलदार, राजदीप यादव, प्रभारी निरीक्षक कृष्ण कुमार गुप्त, सहित विद्युत, पूर्ति और पंचायतीराज विभाग के अधिकारी भी साथ रहे। जिलाधिकारी ने सभी विभागों के अधिकारियों से आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा की। जिलाधिकारी बिजली विभाग को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पोल और तारों की विशेष निगरानी की जाए। कहीं भी तार टूटने या शॉर्ट सर्किट की स्थिति में तत्काल मरम्मत की जाए। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए जेनरेटर की तैयारी रखी जाए।
स्वास्थ्य विभाग को प्रत्येक बाढ़ चौकी और राहत शिविर में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती करने के साथ ही डायरिया, बुखार और सर्पदंश की दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए।
पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने कहा कि बाढ़ के दौरान चोरी और अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि गांवों में नियमित गश्त करें और कंट्रोल रूम को सक्रिय रखें। उन्होंने आमजन से अपील की कि घाघरा के किनारे न जाएं और बच्चों को नदी के पास न भेजें।
एसडीएम दीपक सिंह को डीएम ने निर्देश दिए कि लेखपाल और ग्राम पंचायत सचिवों के माध्यम से गांव-गांव में सर्वे कराकर बाढ़ से संभावित प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जाए। आवश्यकता पड़ने पर राहत शिविर तुरंत खोले जाएं। स्कूलों की इमारतों को राहत शिविर के लिए चिह्नित किया जाए।
निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सिंचाई विभाग को हर दो घंटे पर जलस्तर की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि घाघरा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है इसलिए लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारी फील्ड में रहकर काम करें और किसी भी समस्या की सूचना तत्काल जिला आपदा कंट्रोल रूम को दें।
बाढ़ पीडितों से संवाद स्थापित करते हुए उनकी समस्याओं की जानकारी लिया । इस अवसर पर एसडीएम दीपक सिंह, तहसीलदार ज्ञानेंद्र यादव, नायब तहसीलदार राजदीप यादव, प्रभारी निरीक्षक कृष्ण कुमार गुप्त , योगेंद्र यादव कानूनगो सहित विभिन्न विभाग के अधिकारी रहें।

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