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जिलाधिकारी द्वारा 50 लाख रुपये से अधिक की निर्माण परियोजनाओं की वृहद समीक्षा; कार्यों में तेजी लाने और शत-प्रतिशत गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश

मऊि । जिलाधिकारी श्री आनंद वर्द्धन की अध्यक्षता में कैंप कार्यालय सभागार में 50 लाख रुपए से अधिक लागत वाली निर्माण परियोजनाओं के संबंध में बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री सूचना प्रणाली (CMIS) डैशबोर्ड के अंतर्गत जनपद में चल रहे 50 लाख रुपये से अधिक की लागत वाले समस्त निर्माण और विकास कार्यों की प्रगति का बिंदुवार मूल्यांकन जिलाधिकारी ने किया। बैठक में जिलाधिकारी ने विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं द्वारा कराई जा रही कुल 721 विकास योजनाओं, जिनकी कुल अनुमानित लागत 4,915.77 करोड़ रुपये है, की भौतिक एवं वित्तीय स्थिति की गहन समीक्षा की।
जिलाधिकारी ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष व्यय को तत्काल बढ़ाया जाए।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग (जल शक्ति विभाग): जिलाधिकारी द्वारा इस विभाग की कुल 31 योजनाओं की समीक्षा की गई। इनमें से 25 महत्वपूर्ण योजनाएं (जैसे विभिन्न तटबंधों का सुदृढ़ीकरण व बाढ़ सुरक्षा कार्य) पूर्ण हो चुकी हैं और 6 पर कार्य चल रहा है। विभाग को आवंटित कुल 2,206.40 करोड़ रुपये में से 1,630.41 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है, जो लगभग 99.48% है।
उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण): नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति के अंतर्गत जनपद में सबसे अधिक 552 योजनाएं स्वीकृत हैं। जिलाधिकारी ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि इनमें से केवल 108 योजनाएं ही पूर्ण हो सकी हैं और 444 योजनाएं अभी भी अपूर्ण हैं। हालांकि, 1,429.01 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 892.86 करोड़ रुपये अवमुक्त कर 890.64 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है (वित्तीय प्रगति 99.75%)। जिलाधिकारी ने लंबित ग्रामीण पाइपलाइन परियोजनाओं को युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान जल जीवन मिशन के तहत जनपद में कार्य कर रही कार्यदाई संस्था केएलएसआर तथा एलसी इंफ्रा की प्रगति खराब पाई गई। जिलाधिकारी ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिशासी अभियंता जल निगम को बिना पेनल्टी के भुगतान न हो यह भी सुनिश्चित करने को कहा।
उत्तर प्रदेश जल निगम (शहरी): नगर विकास विभाग के अंतर्गत कुल 7 योजनाओं की समीक्षा की गई, जिनमें से 5 पूर्ण हैं और 2 अपूर्ण हैं। स्वीकृत 78.83 करोड़ रुपये के सापेक्ष 43.43 करोड़ रुपये का व्यय हो चुका है। दो अपूर्ण परियोजनाओं को जिलाधिकारी स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश मुख्य विकास अधिकारी को दिए।
उ० प्र० राजकीय निर्माण निगम लि०: इस संस्था के अंतर्गत स्वीकृत कुल 2 योजनाओं में से 1 पूर्ण हो चुकी है। 53.35 करोड़ रुपये की इन योजनाओं पर अब तक 45.85 करोड़ रुपये खर्च कर शत-प्रतिशत वित्तीय प्रगति हासिल की गई है। इसमें मऊ जिला चिकित्सालय में बन रहा 100 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक (PM-ABHIM) 83.02% भौतिक प्रगति के साथ अंतिम चरण में है。
उ० प्र० प्रोजेक्ट्स कारपोरेशन लि०: गृह, कारागार, अल्पसंख्यक कल्याण एवं चिकित्सा विभागों से जुड़ी कुल 17 योजनाओं में से 15 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। जिलाधिकारी ने थाना दोहरीघाट, चिरैयाकोट, हलधरपुर, सरायलखन्सी, कोपागंज, मधुबन, मुहम्मदाबाद और घोसी में बने हॉस्टल बैरक एवं विवेचना कक्षों के शत-प्रतिशत पूर्ण होने पर संतोष व्यक्त किया।
उ.प्र. राज्य सेतु निगम लि. एवं आवास विकास परिषद: सेतु निगम के अंतर्गत बाल निकेतन के पास इन्दारा-मऊ स्टेशनों के मध्य फोर लेन रेल उपरिगामी सेतु (ROB) का निर्माण कार्य 81.9% भौतिक प्रगति के साथ तेजी से चल रहा है, जिसकी कुल लागत 99.63 करोड़ रुपये है। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद द्वारा जनपद में 4 नग परिवार न्यायालयों का निर्माण कार्य भी 90.32% पूरा कर लिया गया है।
उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम लिमिटेड: गृह एवं गोपन विभाग के अंतर्गत कुल 5 योजनाओं में से 4 पूर्ण हो चुकी हैं। पुलिस लाइन में ट्रांजिट हॉस्टल (जी+8) का निर्माण, 100 पुरुष कर्मियों हेतु हॉस्टल/बैरक का निर्माण तथा मधुबन व घोसी में अग्निशमन केंद्रों की स्थापना का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुका है।
यू पी सिडको एवं सी० एण्ड डी० एस०: सिडको की 5 में से 3 योजनाएं पूर्ण हैं, जिनमें स्पोर्ट्स स्टेडियम में इंफ्रास्ट्रक्चर का जीर्णोद्धार और सिंथेटिक हॉकी मैदान का निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। सी० एण्ड डी० एस० की 17 योजनाओं में से 6 पूर्ण हैं। नगर पालिका परिषद मऊनाथभंजन के विभिन्न वार्डों में फूड स्ट्रीट हब, टाउन हॉल, मैरिज हॉल और विभिन्न घाटों के निर्माण/सौंदर्यीकरण का कार्य प्रगति पर है।
ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (RES) एवं लोक निर्माण विभाग (PWD): ग्रामीण अभियंत्रण सेवा की 46 में से 28 योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जिनमें विभिन्न ग्रामीण संपर्क मार्ग शामिल हैं। लोक निर्माण विभाग की 26 योजनाओं में से 20 योजनाएं पूर्ण हैं और विभाग द्वारा 517.18 करोड़ रुपये के भारी बजट के सापेक्ष 435.07 करोड़ रुपये का व्यय कर 98.9% वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग द्वारा कराया जाए रहे कार्यों की समीक्षा के दौरान कुछ कार्यों की प्रगति बेहद ही कम पाए जाने पर उन्होंने ठेकेदारों पर दबाव बनाते हुए मैनपॉवर बढ़ाकर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। सिंचाई विभाग द्वारा बाढ़ से संबंधित निर्माण कार्यों को जुलाई के पूर्व ही पूर्ण करने के निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिए गए।इस दौरान पूर्वाचल निधि, संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि तथा आदर्श ग्राम योजना की भी समीक्षा कर जिलाधिकारी द्वारा आवश्यक निर्देश दिया दिए गए। जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने सभी कार्यदायी संस्थाओं के अधिशासी अभियंताओं और विभागीय अधिकारियों को समस्त निर्माण अधीन परियोजनाओं की अद्यतन फोटोग्राफ उपलब्ध कराने को कहा। साथी ही गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। कई बार थर्ड पार्टी द्वारा गुणवत्ता को लेकर कोई ठोस रिपोर्ट न देने पर उन्होंने आवश्यक होने पर थर्ड पार्टी निरीक्षण की प्रक्रिया हेतु अन्य विकल्पों पर भी विचार करने को कहा। उन्होंने समस्त कार्यकारी संस्थाओं को शिलान्यास एवं लोकार्पण हेतु परियोजनाओं की सूची डीईएसटीओ को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए तथा यह सूचना नियमित रूप से प्रेषित करने को कहा। इसके अलावा उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को कार्यदाई संस्थाओं द्वारा किए जा रहे कार्यों के सतत निगरानी हेतु नोडल अधिकारियों की तैनाती करने के भी निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने पीडब्ल्यूडी एवं सेतु निगम को यथाशीघ्र सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत ब्लैक स्पॉट चिन्हीकरण की कार्रवाई पूर्ण करते हुए कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी कार्यकारी संस्थाओं को समय सीमा के अंदर गुणवत्तापूर्ण ढंग से परियोजनाएं पूर्ण करने तथा सीएमआई एस पोर्टल पर कार्यों की प्रगति अपडेट रखने के निर्देश दिए। इसके अलावा बरसात पूर्ण पूर्ण होने वाली सभी प्रोजेक्ट को भी तत्काल पूर्ण करने के निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिए गए। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी विवेक श्रीवास्तव सहित समस्त कार्यदाई संस्थाओं के अधिशासी अभियंता एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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