मऊ। जनपद के मधुबन विधान सभा क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री ग्राम्य संपर्क योजना (CMGSY) 2026-27 के अंतर्गत विधायक रामविलास चौहान के पहल पर मधुबन क्षेत्र की 9 जर्जर और कच्ची सड़कों के नवनिर्माण को हरी झंडी मिल गई है। लोक निर्माण विभाग, निर्माण खंड मऊ द्वारा इन सड़कों की स्वीकृति जारी कर दी गई है।
आजमगढ़ सर्किल के अंतर्गत आने वाले मधुबन क्षेत्र में 9 सड़कों के बन जाने से लगभग दो दर्जन से अधिक गांवों को सीधा लाभ मिलेगा और उनका संपर्क मुख्य मार्गों से बेहतर हो जाएगा। लंबे समय से ग्रामीण इन सड़कों के निर्माण की मांग कर रहे थे। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार स्वीकृत 9 सड़कों की कुल लंबाई 12.55 किलोमीटर है, जिनके निर्माण पर लगभग 9 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी।
इस संबंध में विधायक रामविलास चौहान ने बताया कि सबसे लंबी सड़क पथरिया कुटी से कपिला तरनपुर होते हुए मानिकचंद यादव के घर होते हुए सिकड़ीकोल बंधे तक बनाई जाएगी। इसकी लंबाई 2.97 किमी है और इस पर 173.19 लाख रुपये खर्च होंगे।इसी तरह दोहरीघाट मुख्य नहर की पटरी से फोटडा, मांडरिया होते हुए चिच्छोलपुरवा तक 1.50 किमी लंबी सड़क का निर्माण 114.37 लाख की लागत से होगा। ग्रामसभा सौदी नहर से खजुहा तक 1.30 किमी सड़क 103.77 लाख में, और ग्राम सभा सौदी में ही ब्रम्ह स्थान से चौरसा से चौहान बस्ती होते हुए भटौली राजभर बस्ती तक 1.30 किमी सड़क 99.77 लाख की लागत से बनाई जाएगी। तालपताछ स्कूल से बनकटा संपर्क मार्ग होते हुए करनपुर तक 1.28 किमी सड़क के अवशेष भाग का निर्माण 100.24 लाख में होगा। सुग्गीचौरी पूल से झब्बर चौहान की कुटिया के पास नाला होते हुए छोटी बढ़ुआ (शिवसा) तक 1.10 किमी सड़क 87.38 लाख में और करचन्द रोड से झग्गू चौहान के घर होते हुए बखरिया इंटर कॉलेज तक 1.10 किमी सड़क 91.41 लाख में बनेगी। घोसीली ग्रामसभा से तारनपुर तक 1.00 किमी सड़क 76.95 लाख में और सयाद बड़े ख्वाजा संपर्क मार्ग से खड़गुन होते हुए तमकरी गांव तक 1.00 किमी सड़क 78.99 लाख की लागत से बनाई जाएगी।
इन सड़कों के निर्माण की स्वीकृति मिलने से क्षेत्र के ग्रामीणों में खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में इन कच्चे रास्तों पर कीचड़ और जलभराव के कारण चलना मुश्किल हो जाता था। बच्चों को स्कूल जाने और मरीजों को अस्पताल ले जाने में भारी परेशानी होती थी। सड़क बन जाने से किसानों को भी अपनी उपज मंडी तक ले जाने में आसानी होगी।










