Home मऊ हीट वेव के दृष्टिगत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जारी की एडवाइजरी

हीट वेव के दृष्टिगत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जारी की एडवाइजरी

0 अधिक गर्मी वाले समय में विशेष कर 12 से 03 बजे के मध्य सूर्य की सीधी रोशनी में जाने से बचें*

0 पानी का अधिक मात्रा में करें सेवन*

मऊ। अपर जिलाधिकारी प्रवेंद्र कुमार ने बताया कि जनपद के तापमान में लगातार उष्णता दर्ज की जा रही है, ऐसी स्थिति में हीट वेव की सम्भावना बनी रहती है। जिला आपादा प्रबंधन प्राधिकरण, मऊ हीट बेव से बचाव की तैयारी करने हेतु निम्न बिंदुओं पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता है।

0 क्या करे और क्या न करे —

हीट वेव/लू के सम्बन्ध में प्रचार माध्यमों से जारी की जा रही चेतावनी पर ध्यान दें।
हीट स्ट्रोक, हीट रैश, हीट कैम्प के लक्षणों जैसे कमजोरी, चक्कर आना, सरदर्द, उबकाई, पसीना आना, मूर्छा को पहचाने।
कमजोरी अथवा मूर्छा जैसी स्थिति का अनुभव होने पर तत्काल चिकित्सीय सलाह लें।
हाईड्रेटेड रहें (शरीर में जल की कमी से बचाव)-
अधिक से अधिक पानी पीये, यदि प्यास न लगी हो तब भी। यात्रा करते समय पीने का पानी अपने साथ अवश्य ले जायें।
ओआरएस घर में बने पेय पदार्थ, जैसे लस्सी, चावल का पानी (माङ), नीबू पानी, छांछ आदि का उपयोग करें, जिससे शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सकें।
जल की प्रचुर मात्रा वाले मौसमी फलों एवं सब्जीयों का प्रयोग करें, यथा तरबूज, खरबूज, संतरें, अंगूर, अन्नास खीरा, ककडी तथा सलाद का प्रयोग करें।

0 शरीर को ढक कर रखें–

हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले हल्के वस्त्र पहने। घर से बाहर जाते समय धूप के चश्में, छाता, टोपी व चप्पल का प्रयोग करें।
अगर आप खुले में कार्य करते है तो सिर, चेहरा, हाथ पैर को गिले कपड़े में ढके रहे, तथा छाते का प्रयोग करें। यथा संभव अधिक से अधिक अवधि के लिए घर, कार्यालय इत्यादि के अन्दर रहे-
उचित वायु संचरण वाले शीतल स्थानों पर रहे। सूर्य के सीधी रोशनी तथा उष्ण हवा को रोकने हेतु उचित प्रबन्ध करें, अपने घरों को ठंडा रखे दिन में खिड़कियां, पर्दे तथा दरवाजे बन्द रखें विशेषकर घर तथा कार्यालय के उन क्षेत्रों में जहाँ सूरज की सीधी रोशनी पड़ती हो। शाम/रात के समय घर तथा कमरों को ठण्डा करने हेतु इन्हें खोल दें।
घर से बाहर होने की स्थिति में आराम करने की समयावधि तथा आवृत्ति को बढ़ायें।
पंखे तथा गीले कपडे का उपयोग करें।
जानवरों को छायादार स्थानों पर रखें तथा उन्हें पर्याप्त पानी पीने को दें।

0उच्च जोखिम समूहों हेतु–

निम्न उच्च जोखिम समूह सामान्य आबादी की तुलना में हीट वेव के लिए अधिक संवेदनशील होते हैं, इन समूहों के बचाव पर अधिक ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है। एक वर्ष से कम आयु के शिशु तथा अन्य छोटे बच्चे। गर्भवती महिलाएं। वाह्य वातावरण में कार्य करने वाले व्यक्ति।
बीमार व्यक्ति, विशेष कर हृदय रोगी अथवा उक्त रक्तचाप से ग्रस्त व्यक्ति।
ऐसे व्यक्ति जो ठंडे क्षेत्रों से गरम क्षेत्रों में जा रहे हो।

0 अन्य सावधानियां–

ऐसे बुर्जुग व बीमार व्यक्ति जो एकांतवास करते हो, के स्वास्थ्य के नियमित रूप से देखभाल तथा पर्यवेक्षण की जानी चाहिए।
दिन के समय अपने घर के निचले तल पर प्रवास का प्रयास करें।
शरीर के तापमान को कम रखने के लिए पंखे तथा गिले कपड़े इत्यादि का प्रयोग करे।

0 क्या न करें–

अधिक गर्मी वाले समय में विशेष कर 12 से 03 बजे के मध्य सूर्य की सीधी रोशनी में जाने से बचें। नंगे पैर बाहर न निकले।
अधिक प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के प्रयोग से यथा संभव बचें तथा बासी भोजन का प्रयोग न करें। बच्चों तथा पालतू जानवरों को खड़ी गाड़ियों में न छोड़ें। गहरे रंग के भारी तथा तंग कपडे न पहने।
जब बाहर का तापमान अधिक हो तब श्रमसाध्य कार्य न करें।
अधिक गर्मी वाले समय में खाना बनाने से बचे, रसोई वाले स्थान को ठंण्डा करने के लिए दरवाजे तथा खिड़कियां खोल दें।
शराब, चाय, कॉफी, कार्बोनेटेड साफ्ट ड्रिंक आदि के प्रयोग करने से बचें।

0नियोक्ताओं तथा कर्मचारियों हेतु निर्देश —

कार्य स्थल पर शीतल पेय जल की व्यवस्था करें तथा कर्मियों को प्रत्येक 20 मिनट की अवधि पर जल का सेवन करने हेतु कहें, ताकि उनके शरीर में जल की कमी न हो। कर्मियों को सीधी सूर्य की रोशनी से बचने हेतु सावधान करें।
कर्मियों हेतु छायादार कार्य स्थलों का प्रबन्ध करें, इस हेतु कार्य स्थल पर अस्थायी शेल्टर का निर्माण किया जा सकता है।
अधिक श्रमसाध्य तथा बाह्य वातावरण में किए जाने वाले कार्यों को दिन के ठण्डे समय पर किए जाने हेतु प्रबंध करें, जैसे सुबह अथवा शाम के समय। बाह्य वातावरण में किये जाने वाले कार्य हेतु विश्राम की अवधि तथा आवृत्ति को बढ़ाएं-प्रत्येक घंटे के श्रमसाध्य कार्य के उपरान्त न्युनतम 5 मिनट का विश्राम दिया जा सकता है। तापमान के अधिक होने पर कर्मियों की संख्या बढ़ाये अथवा कार्य की गति को धीमा करें।
अधिक तापमान के कारण उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य स्थितियों के लक्षणों तथा अधिक तापमान से संबंधित रोगों के खतरों को बढ़ाने वाले कारकों को पहचानने हेतु कर्मियों को प्रशिक्षित करें।

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