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तेंदुए की तलाश में लाखों का खर्च, 36 घंटे बाद भी हाथ खाली, “खोदा पहाड़ निकली चुहिया” साबित हुआ अभियान

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बलिया। मनियर थाना क्षेत्र के पुरुषोत्तम पट्टी गांव में कथित तेंदुए की तलाश को लेकर चला वन विभाग और प्रशासन का हाईप्रोफाइल अभियान आखिरकार “खोदा पहाड़ निकली चुहिया” वाली कहावत को चरितार्थ करता नजर आया। शुक्रवार को दो लोगों के घायल होने के बाद पूरे इलाके में तेंदुए की दहशत फैल गई थी। करीब 36 घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन में गोरखपुर से विशेष रेस्क्यू टीम बुलानी पड़ी, ड्रोन कैमरे लगाए गए, जेसीबी मशीनों से ज्वार के खेतों की खुदाई कराई गई, लेकिन अंत तक तेंदुए का कोई ठोस सुराग नहीं मिला।घटना के बाद वन विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम लगातार गांव में डटी रही। गोरखपुर से विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम के आने, कर्मचारियों की आवाजाही, वाहनों का उपयोग, ड्रोन कैमरे, जेसीबी मशीन और सुरक्षा व्यवस्था पर अनुमानित तौर पर हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का खर्च बैठने की चर्चा ग्रामीणों के बीच जोरों पर है। हालांकि विभाग की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से खर्च का कोई आंकड़ा जारी नहीं किया गया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर अभियान चलाने में भारी सरकारी संसाधन लगाए गए।शुक्रवार को खेत की ओर गए दो ग्रामीणों पर किसी जंगली जानवर ने हमला कर दिया था। लोगों ने उसे तेंदुआ बताते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग घरों में दुबकने लगे। वन विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल इलाके की घेराबंदी की और सर्च ऑपरेशन शुरू कराया।शनिवार को गोरखपुर से पहुंची रेस्क्यू टीम ने ड्रोन कैमरे की मदद से ज्वार के खेतों और बागों की निगरानी की। बताया गया कि ड्रोन में किसी बड़े जानवर जैसी हलचल दिखाई देने पर जेसीबी मशीन से खेतों में रास्ता बनाकर तलाश अभियान तेज किया गया। घंटों तक चली कार्रवाई के बावजूद न तो तेंदुआ मिला और न ही उसके ताजा पंजों के निशान।अभियान के दौरान गांव में भारी भीड़ जुटी रही। ग्रामीणों में भय का माहौल अब भी कायम है। बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं और किसान खेतों में अकेले जाने से बच रहे हैं। कई गांवों में रात के समय ग्रामीण पहरा भी दे रहे हैं।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इलाके में लगातार निगरानी रखी जा रही है। किसी भी संदिग्ध जानवर की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि अगर तेंदुआ था तो वह आखिर गया कहां, और अगर नहीं था तो इतने बड़े स्तर पर चलाए गए अभियान तथा खर्च का जिम्मेदार कौन है। फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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